क़ातिल की जय-जयकार, इंसाफ हुआ है – पंकज रायबरेलवी

Zakia Jaffri 7

Zakia Jafri

cropped-hille-le-copy.jpg

लो आ गई बहार, इंसाफ हुआ है
क़ातिल की जय-जयकार, इंसाफ हुआ है

मुर्दों की कैद से वो, आजाद हो गया
अब राजपथ बुहार, इंसाफ हुआ है

मक़तल का हर निशान, देता है गवाही
मुंसिफ कहे बेकार, इंसाफ हुआ है

चांदी की है कटार, सोने की मूठ है
फिर क्यों करो गुहार, इंसाफ हुआ है

कुछ फर्क नहीं है, कब्र और सड़क में
ख़बरे हैं धुआँधार, इंसाफ हुआ है

सच्चाई की है पीठ, झूठे की जूतियाँ
हँसता है गुनहगार, इंसाफ हुआ है

घड़ियाल भी यहाँ , शरमा रहा हुज़ूर
रोया वो ज़ार-ज़ार, इंसाफ हुआ है

.पंकज रायबरेलवी

Leave a comment