तरूण तेजपाल मिलान कुंदेरा को पढ़ते थे – Manisha Pandey

Manisha Pandey
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इंडिया टुडे में तरूण तेजपाल पर कवर स्‍टोरी छपी है। कल ऑफिस में वो स्‍टोरी पढ़ रही थी। अचानक एक लाइन पर मेरी आंखें रुक गईं। स्‍टोरी बताती है उस जवान, टैलेंटेड, निहायत काबिल तरूण तेजपाल के बारे में जो एडिटिंग के कामों के बीच ऑफिस में बैठकर मिलान कुंदेरा को पढ़ता रहता था।
मिलान कुंदेरा ? मिलान कुंदेरा मतलब कि द जोक? अनबिअरेबल लाइटनेस ऑफ बीइंग? लाइफ इज एल्‍सव्‍हेयर ? इममॉरटैलिटी ?

मैं भी एक आदमी को जानती हूं, 24 साल की उमर में मैं जिसके प्रेम में थी। वो भी मिलान कुंदेरा को पढ़ता था। ओरहान पामुक को, कोएट्जी को, समरसेट मॉम को, तोल्‍स्‍तोय को, मुराकामी को। मैं उससे जितना प्रेम करती थी, उससे ज्‍यादा इज्‍जत थी मेरे दिल में उसके लिए क्‍योंकि वो फेलिनी और इंगमार बर्गमैन की फिल्‍में देखता था। तब तक मेरे लिए सिनेमा का मतलब था, बिमल रॉय, ऋषिकेश मुखर्जी और राजकुमार संतोषी। उसने मुझे “एट एंड हाफ” और “नाइट्स ऑफ कबीरिया” दिखाई। “क्राइज एंड व्हिसपर्स” मैंने उसी के घर में देखी। उसने मुझे डेढ़ सौ जीबी की हार्ड डिस्‍क में वर्ल्‍ड सिनेमा की बेहतरीन दो सौ फिल्‍में कॉपी करके दीं। उसने मुझे फिल्‍म देखना सिखाया और इस तरह इलाहाबाद के कन्‍या पाठशाला में हिंदी पढ़ने वाली बहनजी टाइप उस कुछ सीधी, कुछ मूर्ख सी लड़की के लिए एक नई दुनिया के दरवाजे खोल दिए। मुझे नहीं पता था कि सिनेमा ऐसा भी हो सकता है। मुझे नहीं पता था कि अपनी जिंदगी के सैकड़ों सवालों के जवाब मुझे दुनिया के बेहतरीन सिनेमा में मिलेंगे, मेरी जिंदगी बदल जाएगी, मैं बदल जाऊंगी।

लेकिन वो फिल्‍में और किताबें खुद उसे कहां बदल पाईं। किताबें उसे भी एक औरत को शरीर से ऊपर उठकर देखना नहीं सिखा पाईं। रोजमर्रा की जिंदगी में लोकतांत्रिक होना नहीं सिखा पाईं। उस स्‍पेस में हर विशेषाधिकार सिर्फ उसके लिए सुरक्षित था। वो तय करेगा कि मैं कब उसके घर जाऊंगी और कब नहीं जाऊंगी। वो तय करेगा कि कब हम साथ होंगे और कब नहीं होंगे। कब, कहां, कैसे, क्‍या करना और नहीं करना, सब वो तय करेगा। अपनी जिद में, अपनी ऐंठ में, अपने अहंकार में, अपनी खुमारी में। मेरा काम था चौंकन्‍नी आंखों से उसकी बातें सुनना और अभिभूत होना। आर्यकन्‍या पाठशाला की लड़की जरूर हथेली पर गाल टिकाकर फटी आंखों से उसकी बात सुन सकती थी, लेकिन डॉरिस लेसिंग, ओरियाना फेलाची पढ़ चुकी और इतनी सारी फिल्‍में देख चुकी लड़की को पता चल गया कि उसे क्‍या चाहिए। उसे भी तय करनी हैं चीजें। उसकी भी मर्जी होगी। उसको भी बोलना है – ना।
उसके साथ मिलान कुंदेरा और फेलिनी की मुहब्‍बत से शुरू हुआ सफर बहुत कड़वे मोड़ पर आकर खत्‍म हुआ और इस तरीके से जो दुनिया की किसी भी स्‍वाभिमानी लड़की के लिए बहुत इंसल्टिंग था।
…………..
– इतने साल बाद आज भी मैं एकबारगी तो उन लोगों को अच्‍छा ही मान बैठती हूं, जो मिलान कुंदेरा को पढ़ते हैं और फतीह अकिन की फिल्‍में देखते हैं। लेकिन अगर ये सब करने वाला कोई पुरुष हो तो अब मेरा एंटीना खड़ा रहता है। मुझे पता है कि मिलान कुंदेरा को पढ़ने से कोई औरत की इज्‍जत करना नहीं सीखता। मिलान कुंदेरा को पढ़ने वाला आदमी भी बिस्‍तर पर अपनी पत्‍नी और प्रेमिका के साथ दबंग दादा हो सकता है। मिलान कुंदेरा को पढ़ने वाला आदमी भी शक्‍की, अहंकारी और औरत के मामले में निहायत गलीज हो सकता है। मिलान कुंदेरा को पढ़ने वाले आदमी के लिए भी औरत फतह करने और हासिल करने की चीज हो सकती है।

तरूण तेजपाल मिलान कुंदेरा को पढ़ते थे।

मैं भी एक ऐसे आदमी को बहुत करीब से जानती हूं, जो मिलान कुंदेरा को पढ़ता था।

One thought on “तरूण तेजपाल मिलान कुंदेरा को पढ़ते थे – Manisha Pandey

  1. maza aaya pade ke. qusoor un logon ka nahin hai qusoor hamara hai ki , ek hindi girls schools mein padne ke baad bhi ham cheezon ko bahut jaldi seekh gaye aur shayad ye kuchh logon ko bardashat nahin hota , i mean they can not accept the change in us easily, the change which came very easily to US.
    ( magar phir bhi on a lighter note… how could a person who reads all these stuff be like that ???? why Mr. Tejpal whyyyyyy????

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