रोज़ सूरज संग – Ila Joshi

Ila Joshi

उसने कई बार
अपने बिखरे जिस्म
और रूह को समेटा
पर उनको न रास आई
उसकी ये बेहुदा हरकत

एक आख़िरी बार
तार तार किया
उसकी रूह और जिस्म को
जिसे जमा पिघले मोम संग
रख दिया नुमाइश को

अब रोज़ सूरज संग
पिघलता है,
थोड़ा मोम,
थोड़ा जिस्म,
थोड़ी रूह,
और ढेर सारी इंसानियत…

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