एक पूरी पीढ़ी के
कंकालों पर
रखी जाती है नींव
आने वाली किसी पीढ़ी के
उत्तराधिकार की नींव
नींव मज़बूत होनी चाहिए
गरीबों से मज़बूत हड्डियां
और कंकाल
किसके हो सकते हैं भला…
सिंहासन खाली करो कि
जनता आती है
ये सच नहीं था
सच था सिर्फ सिंहासन
जनता का आना
सपना था
और हां…
कंकाल…और पाए
सपने देखते हैं कहीं…

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