कंकाल – Mayank Saxena

Mayank

एक पूरी पीढ़ी के
कंकालों पर
रखी जाती है नींव
आने वाली किसी पीढ़ी के
उत्तराधिकार की नींव
नींव मज़बूत होनी चाहिए
गरीबों से मज़बूत हड्डियां
और कंकाल
किसके हो सकते हैं भला…
सिंहासन खाली करो कि
जनता आती है
ये सच नहीं था
सच था सिर्फ सिंहासन
जनता का आना
सपना था
और हां…
कंकाल…और पाए
सपने देखते हैं कहीं…

One thought on “कंकाल – Mayank Saxena

  1. Omg you’re here!!! I’ve been looking all over for you and how cool that you’re writing here!! If I could read hindi I would probably say wah wah!!

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