मैं हूं – Mrityunjay Prabhakar

 

 

 

 

mrityunjay

 

 

 

 

गेहूं की बालियों
मटर के दानों
चावल की बोरियों
आलू के खेतों में

बनमिर्ची के झुरमुटों
आम के दरख्तों
जामुन की टहनियों
अमरूद के पेड़ों में

गांव की गलियों
खेतों की पगडंडियों
सड़कों के किनारों
शहरों की परिधि में

रात की चांदनी
सहर के धुंधलके
शाम की सस्ती चाय
दोपहर के सादे भोजन में

साइबरस्पेस के किसी कोने
ब्रह्मांड के किसी छोर
मित्रों-परिचितों की याद
आत्मीयों के प्यार में

मैं उन्हीं सबमें हूं
जो मेरे भीतर हैं।

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