धर्म की जय हो – Mayank Saxena

रक्तों के सागर में

Mayank 2

स्नान कर
आया है
खा कर
मानव अंतड़ियां
नाखूनों में देखो
अभी तक भरा है
मज्जा का गूदा
आंखों से
बह रही है
हिंसा…और हिंसा
उसके नाम अलग अलग हैं
उसका तरीका एक ही
धर्म की जय हो
अधर्म का नाश हो…

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