तुम सिर्फ गण के कवि हो – Mayank Saxena

Mayank

मैंने कहा
मैं कवि हूं
बांध दूंगा
अपनी कविता में तुम्हें
रोक दूंगा
तुम्हारी उत्श्रृंखलता को
वो बोला
मैं कांवड़िया हूं
तोड़ दूंगा
तुम्हारी कलम
छीन कर
जला दूंगा सारे कागज़
हड्डियां छितरा दूंगा
फिर लिखना कविता
तुम सिर्फ गण के कवि हो
और मैं
शिव का गण हूं…

हर हर महादेव….

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