अब मदद नहीं चाहिए शिवा को – Mayank Saxena

Uttarakhand Diary
18th July, 2013

shiv

कुछ रोज़ पहले हम ने फेसबुक पर शिवा यानी कि शिव प्रसाद की तस्वीरें शेयर की थीं…शिवा का घर बाहरी दुनिया से कट चुके चंद्रपुरी इलाके में है…घर में सिर्फ एक कमरा है, जिसके ऊपर एक रिसती हुई छत है…बेहद गरीब शिव की रीढ़ की हड्डी डेढ़ साल पहले टूटी थी…गरीबी ने इलाज का मौका नहीं दिया…डेढ़ साल तक बिस्तर पर पड़े पड़े शिवा के शरीर में बेड सोर्स हुए और फिर कमर के नीचे का पूरा हिस्सा गलने लगा…सेप्टीसीमिया फैलने लगा…हमारी टीम 15 दिन पहले जब शिवा से मिली तो उसकी हालत बेहद गंभीर थी…हमने अपने स्तर पर कोशिश शुरु की उसे एयरलिफ्ट करवा कर अस्पताल तक पहुंचाने की…
फेसबुक पर हमने शिवा की मदद के लिए अपील जारी की…मेरी उस पोस्ट के 80 शेयर हुए…लेकिन मदद नहीं आई…मौसम खराब होने के कारण हेलीकॉप्टर एक बार नहीं आ पाया…और उसके बाद प्रशासन ने आंखे मूंद लीं…तीन दिन पहले हम शिवा से फिर मिलने गए…पता चला कि 1 रोज़ पहले ही राज्य के कृषि मंत्री शिवा के घर के सामने हेलीकॉप्टर से उतरे, न मौसम का असर हुआ न ज़मीन की कमी का…हां वो उसे देखने ज़रूर नहीं गए…मंत्री जी के पास सिर्फ 5 मिनट जो थे…
शिवा की हालत उस रोज़ बेहद खराब थी…उसने 3 रोज़ से कुछ खाया नहीं था…अंततः तमाम कोशिशों के बाद रुद्रप्रयाग के सीएमओ ने उसे एयरलिफ्ट करवाने पर हामी भर दी… हम बेहद खुश थे कि अब शिवा बच जाएगा क्योंकि उसके पास सिर्फ 3-4 दिन बचे लगते थे…कल शाम फिर मौसम खराब हुआ…आज हमारी टीम शिवा के घर गई उसके एयरलिफ्ट के बाबत चर्चा करने…
शिवा कल रात चला गया…हम सबको सिर्फ ये सोचता छोड़ कर कि हम वाकई बहुत कुछ कर सकते हैं…हम अपने सबसे अहम मिशन में असफल रहे…लेकिन क्या सिर्फ हम असफल रहे…हमारा समाज जो ऐसे गरीबों को मरने के लिए छोड़ देता है…हमारी सरकारें, जिनके लिए शिवा सिर्फ एक वोट है जो कम हो गया…हमारा सिस्टम जिसमें इंसानी जान सिस्टम के आगे घिसटती हुई खत्म हो जाती है…हमारे अधिकारी जो हर काम के लिए कागज़ी कार्रवाई में सालों निकाल देते हैं जबकि नेता जी के परिवार के जूते तक उठा लेते हैं…हम जो मंदिरों के दानपात्र में गड्डियां फेंक आते हैं, हज करने के लिए लाखों खर्च कर देते हैं…शादियों पर करोड़ों उड़ाते हैं…हम असफल नहीं हैं क्या…
नेताजी आपका हेलीकॉप्टर जहां उतरा था, वहीं से शिव का शव गया है…उसकी दयनीय आंखें आपको माफ़ नहीं करेंगी…हमेशा घूरती रहेंगी…नौकरशाहों से अनुरोध है कि पद ग्रहण करें लेकिन शपथ लेना छोड़ दें…और हां धर्म के ठेकेदारों जल्दी से केदारनाथ में पूजा शुरु कराओ, चढ़ावा नहीं आ रहा है एक महीने से….आपदा के ठीक 1 महीने बाद शिव ने आखिरी सांस ली है…
शिवा की याद हमारा पीछा नहीं छोड़ने वाली है…लेकिन इस देश में लाखों शिवा है…आप शर्म मत कीजिएगा क्योंकि फिर हर बार आपको हर गरीब पर तरस आएगी…हर बार नई गाड़ी खरीदते वक्त आप सोचेंगे…न न ज़िंदगी मुश्किल हो जाएगी…शिव के पास जब सड़क थी तब उसके पास संसाधन और मदद नहीं थी…जब संसाधन और बूंद वहां पहुंचे तो सड़ नहीं बची थी…उसके पास सिर्फ आसमानी रास्ते थे…एक हेलीकॉप्टर के ज़रिए और एक आखिरी रास्ता…उसने आखिरी रास्ता चुन लिया है…उसे ज़िंदगी ने मोहलत दी लेकिन हमने रास्ता नहीं दिया…शिव तुमको आखिरी सलाम….हमें माफ़ कर देना…हम तुम्हारे लिए कुछ नहीं कर पाए…
सलाम….
शर्म…
धिक्कार…

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