जांच से पहले इंडिया टुडे के पत्रकार का फैसला: शाहनवाज़ मलिक

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इशरत जहां फर्ज़ी मुठभेड़ मामले की जांच सीबीआई कर रही है। सीबीआई ने अब तक की जांच में गुजरात पुलिस के कई अधिकारियों के अलावा इंटलिजेंस ब्यूरो के आला अफसर राजेंद्र कुमार की भूमिका पर सवालिया निशान लगाया है। सीबीआई  जांच पूरी होने के बाद ही यह पता चल पाएगा कि 15 जून 2004 को अहमदाबाद में जिन चार लोगों की हत्या की गई, वे फर्ज़ी मुठभेड़ का शिकार हुए या फिर वाक़ई लश्कर के आतंकी थे। लेकिन उससे पहले इंडिया टुडे ग्रुप की हिंदी साइट aajtak.indiatoday.in ने इशरत जहां फर्ज़ी मुठभेड़ मामले में सभी को आतंकवादी करार दिया है।

अमरेश सौरभ के नाम से साइट पर छपी खबर में कहा गया है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों के निशाने पर थे। रिपोर्ट आगे कहती है- इशरत जहां समेत चारों आतकवादी फर्जी मुठभेड़ में मारे गए या नहीं, इस बात का फैसला अदालत करेगी, लेकिन एक बात साफ है कि इशरत आतंकवादी थी औऱ उसका रिश्ता लस्कर-ए- तैयबा के कमांडर के साथ ही उन दोनों पाकिस्तानियों से भी था, जिनको हिंदुस्‍तान में नेताओं औऱ वीआईपी लोगों को मारने की मंशा से लस्कर ने भेजा था.

पत्रकार अमरेश सौरभ ने आईबी के एक ख़त और सीबीआई को भेजी गई एक चिट्ठी के आधार पर इशरत जहां को लश्कर-ए-तैय्यबा का आतंकी घोषित कर दिया है। जबकि उसी आईबी के विशेष निदेशक राजेंद्र कुमार पर सीबीआई ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

यह निहायत शर्मनाक है कि देश के सबसे बड़े मीडिया घरानों में से एक इंडिया टुडे ग्रुप पत्रकारीय धर्म को तार-तार कर रहा है। बार-बार अपनी कामयाबी और शोहरत का डंका पीटने वाला यह ग्रुप इतना ग़ैरज़िम्मेदार कैसे हो सकता है कि खुलासे और खबर की आड़ में नफरत का कारोबार करे। जिस मुठभेड़ के बाद राजनेता, पुलिस और खुफिया एजेंसियों पर सवालिया निशान लग गया है, जिसे मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट और एसआईटी ने फर्ज़ी करार दिया है और जिसकी जांच फिलहाल सीबीआई कर रही है, उसके बारे में एक पत्रकार फैसला कैसे सुना सकता है।

बहरहाल, अभिव्यक्ति की आज़ादी का हवाला देकर मुल्क की साझी विरासत और क़ौमी-एकता पर चोट करने वाली इस तरह की रिपोर्ट और पत्रकार कोई नई बात नहीं हैं। लेकिन गलतियां इंसान का सबसे बड़ा सबक होती हैं। ग़लतियों का एहसास होने पर वे इन्हें दोहराने से बचते हैं। मेरी गुज़ारिश है कि इन सबसे बचा जाए। इंडिया टुडे ग्रुप की विश्वसनीयता और इस पेशे का तक़ाज़ा भी फिलहाल यही है।  

 

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