एरिच फ्रीड की 3 कविताएं
अनुवाद – मयंक सक्सेना
Learnprozess
(सीखने का प्रक्रम)
मैं कुछ नहीं हूं
मैं हूं विश्व का आखिरी अस्तित्वहीन
अपने समय की क्रांति का
चीखा….एक प्रेरणा पाता
कलाकार
उन्होंने दोहराया
तुम कुछ नहीं हो
तुम आखिरी बचे अस्तित्वहीन प्राणी हो
हमारी क्रांति में
इस बार वो हताश था…
………………
Asche
(राख)
हां, मैं राख हूं..
अपनी ही आग की राख
मैं बन गई/गया अपनी लकड़ी
और खुद ही कुल्हाड़ी
जिसने चीरा मुझे
अपने ही हाथों में थाम कर
और खुद ही जलाया
खुद को
जब तक मैंने हासिल नहीं की
ठंडक
अपनी ही राख में
……………
Angst und Zweifel
(बेचैनी और शंका)
मत करो शंका
उस पर
जो कहता हो कि वो
बेचैन है
लेकिन हां
बेचैन हो जाए सुनकर
जब कोई कहे
कि
उसे कोई शंका ही नहीं


very nice