तेरा कारोबार चले – Mayank Saxena

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कभी तिरशूल चले और कभी तलवार चले
तेरी ज़ुबान चले, तेरा कारोबार चले

……..

एक देश में
करोड़ों लोग भूखे थे
जिनके पास थी रोटी
वो बचाने निकल पड़े
धर्म को
बड़ी लड़ाई थी
अंततः
धर्म ज़िदा बच गया
इंसानियत मर गई
धर्म की विजय हो…
अधर्म का नाश हो…

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