कई पेट भरे लोग ये मानते हैं और खुले आम कहते हैं, कि रेप सिर्फ गरीब ही करते हैं…जी सही कहा…पैसे से खरीदा, ताकत से हासिल किया, मजबूरी का फ़ायदा उठा कर किया गया और इंसाफ़ के मुंह पर नोटों की गड्डियां मार कर किया गया रेप, रेप थोड़े ही होता है…पूंजीपति कहां रेप करते हैं…उनको तो हक़ है, हर चीज़ खरीद लेने का…चाहें वो नैतिकता हो, संस्कार हों या फिर इंसाफ़…
पेट भरे होने पर आने वाले विचार ज़्यादा हिंसक होते हैं या फिर खाली पेट आने वाले…सवाल अच्छा है लेकिन जवाब नहीं है…
देखा था इन पेट भरे लोगों को, जो जेसिका लाल…नैना साहनी…प्रियदर्शिनी मट्टू…जैसे न जाने कितने मामलों में अदालत और पुलिस से ये कह कर मुकर गए थे कि हम कुछ नहीं जानते…
इन में से कितने हैं जो भंवरी देवी के बारे में कुछ जानते हैं?
आपको पता है, ये सब फांसी मांगते हैं बलात्कारी के लिए…तब तक, जब तक कि वो कोई नौकरशाह, राजनेता, उद्योगपति, सेलेब्रिटी, अभिनेता, लुटियन ज़ोन का दलाल, फैशन डिज़ाइनर, हेयर स्टाइलिस्ट, मॉडल या फिर इनके बीच का कोई और न हो…
इनके बीच के आदमी को या तो बेवजह फंसाया जाता है, या फिर उसकी सफलता से जलकर…इनके खिलाफ़ साज़िश होती है…या इन बेचारों से भूल हो जाती है…महंगी गाड़ियों में लड़कियों को खींच कर रेप करने वाले कितने रईसज़ादों को सज़ा हुई, हम इसका हिसाब भी चाहेंगे…उनके बाप दें, या फिर फांसी की रट लगाने वाले पेट भरे लोग दें…
दिल्ली के गुनहगारों को सज़ा होनी चाहिए…लेकिन साथ ही फांसी उस मानसिकता को भी होनी चाहिए, जिनके मुताबिक रेप सिर्फ गरीबों-‘जाहिलों’ और ‘भूखे-नंगों’ का डोमेन है…हम जानते हैं कि आपके हम्माम में कितने लोग कपड़े पहने हैं…