एस. अकीला ने सन टीवी बतौर न्यूज़ एंकर/न्यूज़ प्रोड्यूसर दिसंबर 2011 में ज्वाइन किया था। लेकिन जबसे उन्होंने नौकरी शुरू की है, तभी से चैनल के मुख्य संपादक वी. राजा और रिपोर्टरों के कोऑर्डिनेटर वेत्रीवेंधन उनपर अनैतिक प्रस्ताव का दबाव बना रहे हैं। उनके मुताबिक चैनल में स्थायी नौकरी और तनख्वाह में अच्छी बढ़ोतरी ‘समझौतों’ पर निर्भर करती है। हालांकि इस तरह की अनैतिक मांग का यह पहला मामला नहीं है, लेकिन दफ्तर के भीतर विपरीत और डरावने माहौल के कारण कुछ महिला मीडियाकर्मियों ने इस बार पुरजोर विरोध किया है। आरोपियों की बेजा मांग के आगे ना झुकने का नतीजा यह हुआ कि छह महीने प्रोबेशन की अवधि पूरी करने के बाद भी पीड़ित महिला की नौकरी स्थायी नहीं की गई।
इस बीच साल 2012 के नवंबर महीने में एस. अकीला को मिलने वाला दीवाली बोनस भी नहीं दिया गया। इस बाबत जब उन्होंने चैनल के संपादक वी. राजा से बात की, तो उन्होंने अकीला को घर पहुंचकर फोन करने की बात कही। फोन करने पर वी राजा ने अकीला को बताया कि उनकी नौकरी तो स्थायी हो गई है, लेकिन अकीला को उनका भी ‘ख्याल’ रखना चाहिए। अकीला ने फोन कॉल तुरंत काट दी, लेकिन किसी तरह सारी बातचीत को रिकॉर्ड कर लिया।
जब वी. राजा को एहसास हो गया कि अकीला उनके झांसे में नहीं आ रही हैं, तो उन्होंने पीड़ित को परेशान करने के लिए दूसरे हथकंडे अपनाना शुरू कर दिया। वी. राजा अकीला के साथ उनके सहकर्मियों के सामने ही गाली-गलौज करने लगे। बात यहीं खत्म नहीं हुई और 21 जनवरी को वी. राजा ने अकीला को अपने केबिन में बुलाकर धमकाया। उन्होंने कहा कि अगर तुमने अपनी शिकायत सार्वजनिक की तो इसके नतीजे बेहद गंभीर होंगे। इसके तुरंत बाद उन्होंने शिफ्ट तय करने के नियमों का उल्लंघन करते हुए कई हफ्तों तक अकीला की ड्यूटी सुबह के वक्त तय कर दी। इस शिफ्ट में दफ्तर पहुंचने का वक्त सुबह पांच बजे था और अकीला को सुबह साढ़े तीन बजे घर छोड़ना पड़ता था। शर्मनाक यह कि इतनी सुबह की शिफ्ट होने के बावजूद कंपनी की ओर से कैब का कोई इंतज़ाम नहीं किया गया। लगातार सुबह की शिफ्ट में काम करने के बाद एक दिन अकीला ने 26 फरवरी को वी. राजा से इसकी वजह जाननी चाही। जवाब में वी. राजा ने कहा कि उनके साथ ‘एडजस्ट’ ना करने की वजह से लगातार सुबह की शिफ्ट में काम करना पड़ रहा है। अगले कुछ हफ्ते तक सुबह की शिफ्ट में काम करने और घर की ज़िम्मेदारियों से जूझने के बाद हालात बद से बदतर हो गए। तब एस. अकीला ने 19 मार्च को पुलिस से संपर्क किया और यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करवा दी। पुलिस ने उसी दिन चैनल के संपादक वी. राजा को गिरफ्तार कर लिया और दो दिन बाद वेत्रीवेंधन के हाथों में भी उन्हीं आरोपों के तहत हथकड़ी पहना दी गई।
आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी अकीला को सुकून नहीं मिला। तमाम मुसीबतें आगे मुंह बाए खड़ी थीं। वी. राजा की गिरफ्तारी के बाद अज्ञात नंबरों से अकीला को जान से मारने की धमकी भरे फोन आने लगे। मानसिक त्रास का आलम यह था कि अकीला ने दफ्तर के भीतर भी खुद को बिल्कुल तन्हा कर लिया। उनके सहकर्मी कन्नन को सिर्फ इसलिए नौकरी से निलंबित कर दिया गया क्योंकि उन्हें अकीला के साथ हो रहे अन्याय की जानकारी थी और वह उनसे हमदर्दी रखते थे। दफ्तर के ही एक अन्य सहकर्मी ने अकीला और कन्नन के साथ कम ना करने की शिकायत कर दी थी, सो इसी शिकायत का सहारा लेकर कन्नन को निलंबित किया गया। जब अकीला 25 मार्च को दफ्तर पहुंचीं तो उन्हें कोई काम नहीं दिया गया। तय कार्यक्रम के मुताबिक उन्हें दोपहर 12 बजे का न्यूज़ बुलेटिन एंकर करना था, लेकिन उन्हें ऑन एयर जाने की इजाज़त नहीं मिली। क़ायदे-कानून और इंसाफ की लड़ाई का अब पूरी तरह मज़ाक बनने वाला था। 26 मार्च को वी. राजा ज़मानत पर रिहा होकर वापस आ गए और दोबारा दफ्तर ज्वाइन कर लिया। अगले ही दिन उन्होंने एस. अकीला के हाथ में निलंबन की चिट्ठी थमा दी। इस तरह, एक औरत जिसने यौन उत्पीड़न का विरोध किया और अन्याय के ख़िलाफ आवाज़ बुलंद की, उसे चारों खाने चित कर दिया गया।
यहां यह बताना ज़रूरी है कि सन टीवी में यौन उत्पीड़न की शिकायतों को निपटाने के लिए कोई ठोस इंतज़ाम नहीं है। यह मामला 1997 के विशाखा केस के बाद माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की सरासर अवमानना है, जबकि दफ्तर के भीतर बेहतर माहौल बनाकर महिलाकर्मियों के अधिकार सुनिश्चित करवाना हर कंपनी की ज़िम्मेदारी है। लैंगिक समानता और श्रम अधिकारों के इन सिंद्धातों का ज़िक्र सेक्सुअल हैरसमेंट ऑफ वुमेन एट वर्क प्लेस 2012 में भी स्पष्ट रूप से किया गया है, जिसे हाल ही में संसद के दोनों सदनों में पारित किया जा चुका है, बस राष्ट्रपति की सहमति बाकी है।
देशभर की पेशेवर महिला मीडियाकर्मियों के स्वतंत्र मंच नेटवर्क ऑफ वीमेन इन मीडिया ने यौन हिंसा की शिकायतकर्ता के साथ लगातार हो रहे शोषण की तीखी आलोचना की है। मंच ने इस शर्मनाक प्रकरण की एक स्वतंत्र जांच और शिकायतकर्ता की नौकरी तत्काल बहाल करने की मांग की है। इसके अलावा नेटवर्क ऑफ वीमेन इन मीडिया ने चेन्नई स्थित सन टीवी में यौन उत्पीड़न के मामले को नए सिरे से संबोधित करने के लिए कानून को फिर से परिभाषित करने की मांग की है।
हमारी मांगें
1- एस. अकीला की तत्काल बहाली
2- मानसिक क्षति की भरपाई के लिए खर्चा
3- वी. राजा का तत्काल निलंबन और लंबित पड़ी स्वतंत्र जांच की बहाली, केस की पुलिस जांच भी हो
4- थर्ड पार्टी अधिवक्ता, पत्रकार और महिला अधिकार कार्यकर्ता द्वारा इस केस की स्वतंत्र जांच।
5- विशाखा गाइडलाइन के तहत आंतरिक शिकायत कमेटी की स्थापना जोकि ऐसे मामलों से निपटने का दीर्घकालिक उपाय है।
6- विशाखा गाइडलाइंस के तहत सभी मीडिया कंपनियों में शिकायती कमेटी स्थापित की जाए।
दस्तख़त
1. Ammu Joseph, Bangalore
2. Kalpana Sharma, Mumbai
3. Laxmi Murthy, Bangalore
4. Rajashri Dasgupta, Kolkata
5. Sandhya Taksale, Pune
6. Sameera Khan, Mumbai
7. Ranjita Biswas, Kolkata
8. Malti Mehta, Ahmedabad
9. K A Beena, Thiruvananthapuram
10. Sonal Kellogg, Delhi
11. Parul Sharma, Delhi
12. Padmalatha Ravi, Bangalore
13. Melanie Priya Kumar, Bangalore
14. Chitra Ahanthem, Imphal
15. Manjira Mojumdar, Kolkata
16. Sharmila Joshi, Mumbai
17. Sandhya Srinivasan, Mumbai
18. Pushpa Achanta, Bangalore
19. Meena Menon, Mumbai
feministsindia.com से साभार। अनुवादः शाहनवाज़ मलिक
