
ना-ना। तुम क्या सोचते हो, मैं तुमसे बहुत नाराज हूं या तुम्हारे लिए दिल में अरबों टन नफरत पाले बैठी हूं। अरे, बिलकुल नहीं। बल्कि अगर मैं कहूं तो शायद तुम्हें यकीन न हो कि यदि मैं दुनिया में किसी की सबसे ज्यादा शुक्रगुजार हूं तो तुम्हारी ही। तुम्हीं तो हो, जिसने उस कच्ची उमर में इतना लतियाया कि ताउम्र के लिए मुझे तुम्हारी मुहब्बत का गुलाम होने से बचा लिया। सच कहती हूं पूरी ईमानदारी से कि ब…ीस साल की उमर में दुनिया की ज्यादा समझ नहीं थी मुझे। अपने अरमानों की भी नहीं। उस उमर में तो अरमानों की इतनी ही उड़ान थी कि बस तुम्हारा प्यार मिल जाए। यकीन मानो, बस एक ही चीज के लिए मरी जाती थी कि किसी तरह एक घर बसा लूं तुम्हारे साथ। एक बच्चा हो जाए बस। 20 साल की उमर में अगर ये सब ठीक वैसे ही हो गया होता जैसा मैंने चाहा था तो फिर क्या होता। 30 पार कर जब तक समझ आती भी तो वक्त हाथ से गुजर चुका होता। गोद में जिम्मेदारियां होतीं और दिमाग को तुम्हारे हिसाब से चलने की आदत पड़ चुकी होती। फिर उसी को अपनी नियति मान लेती। जवान, उमगती लड़कियों को देखती और सोचती कि मैं तो न कर सकी, तुम ही कुछ करके दिखाओ। ये तुम्हारी लातों का ही असर है कि आज तीस पार भी मैं जवान उमगती लड़कियों जैसी हूं। तुम्हारी दी तकलीफों ने फिर से सोचने का मौका दिया, जिंदगी को रीडिजाइन करने का मौका। और ये नई डिजाइन ज्यादा बेहतर है। ये मॉडर्न डिजाइन है। इसमें आजादी है और स्पेस भी। इसमें दिमाग खुलकर सोचता है और अपने फैसले लेता है। बीस साल की मूर्खताओं को हकीकत में न बदलने देने के लिए तुम्हारा शुक्रिया
एक बार एक लड़का मेरे प्यार में पड़ गया। पागलों की तरह मेरे आगे-पीछे। लेकिन मुझे वो पसंद नहीं था। ठीक है कि उसे मुझसे मुहब्बत थी, लेकिन मुझे उससे मुहब्बत नहीं थी। बिलकुल भी नहीं। वो इस बात को लेकर दुखी होता और हर वक्त आत्म उत्पीड़न की मनोदशा में रहता था। एक दिन मैंने उससे कहा कि देखो दोस्त, ऐसा है, मैं तुमसे प्यार नहीं करती। तुम्हारी भावनाओं को सीरियसली नहीं लेती। तुम इतना मेरे लिए जान द…ेते हो, लेकिन मुझे तुम्हारी ढेले भर की परवाह नहीं है। ऐसे इंसान के लिए जान देने का क्या फायदा जो तुम्हारी भावनाओं की कद्र न करता हो। तुम्हारी ढेले भर की परवाह न करता हो। तुम्हें ऐसे किसी भी इंसान को दो कौड़ी का भाव देने की जरूरत नहीं, जो तुम्हें सीरियसली न ले। एकतरफा प्यार अपनी बेइज्जती के सिवा कुछ नहीं और दुनिया में किसी से भी पहले अपनी इज्जत करना सीखो। सबसे पहले खुद से प्यार करो और हर उस इंसान को जिंदगी से डिलिट मारो, जो तुम्हारी इज्जत न करता हो और तुम्हें सीरियसली न लेता हो। और सबसे पहले मुझे डिलिट मारो, क्योंकि मैं तुम्हारे प्यार को बिलकुल सीरियसली नहीं लेती। वो सन्न रह गया मेरी बात से। वो आज भी इस बात को याद करता है और मेरी बहुत इज्जत करता है उसने दुनिया में और किसी से भी पहले और किसी से भी ज्यादा खुद की इज्जत करना सीखा है। अब वो खुद को सीरियसली लेता है।