HEAR ME ROAR- मेरा गरजना तो सुनो – गेब्रेला गनाओ (अनुवाद खुर्शीद अनवर )

एक औरत हूँ मैं तुम मेरा गरजना  तो सुनो

अपने माज़ी का तकाज़ा, न बहाना  कोई

अपने संघर्ष का अम्बार खुद  आँखों के  तले

और  गर्दन में सफलता की पताका डाले

एक औरत हूँ मैं तुम मेरा गरजना  तो सुनो

मैं भी हिलने की नहीं मैं भी अब रोज़ा पार्क्स

मैं यहीं हूँ, मुझे क्या तुम् रहो या हट जाओ

किसी धमकी किसी आवाज़ की परवाह नहीं

मेरी ताकत का बताऊँ तो तुम्हे पास नहीं

मेरी कूवत में है इंसानियत का साज़-ए-निहा

एक औरत हूँ मैं तुम मेरा गरजना  तो सुनो

यह पसीना यह दमकते हुए खूँ  के धब्बे

यह निशानी है मेरे गर्भ में जो बीज पड़े

एक दाने सा जो फूला हुआ गुब्बारा बने

तुम को रखने को मेरा पेट जो हरदम फैले

हर महीने जो मेरे पेट में कोहराम चले

और वह दर्द जो जनने के समय मुझको मिले

जिस्म का दर्द कि जिस से मुझे आराम मिले

जिस से कि तुमको हमेशा ही मेरा प्यार मिले

एक औरत हूँ मैं तुम मेरा गरजना  तो सुनो

बोझ एक सर पे लिए जैसे नशा हो कोई बेदयारी , और जिस्मों पे “ग्रैफिटी” पायी

पर कोई धब्बा कोई गर्द शिकस्त दे न सका

मेरी मुस्कान कोई मुझसे कभी ले न सका

मैंने जाना कि मैं लड़की थी कभी अब लेकिन

एक औरत में ढली गर्व है मुझको लेकिन

एक औरत हूँ मैं तुम मेरा गरजना  तो सुनो

मुझसे मत कहना कि तुम कैद रहो पिंजरे में

मुझसे मत कहना कि कैसी लगो तुम दिखने में

जिस्म की सिलवटें हैं मेरी सजावट के निशां

जैसे एक हुस्न  था कि नाम मदर टेरेसा था

दर्दमंदी है  किसी मक्र से लेना क्या है

यह ज़मीन मेरी है हक अपना मुझे लेना है

एक औरत हूँ मैं तुम मेरा गरजना  तो सुनो

(अनुवाद खुर्शीद अनवर )

 

Leave a comment